Radha Janam Ki Katha-राधा जन्म कथा | 

Radha Janam Ki Katha-राधा जन्म कथा | 

 राधा जन्म के विषय में के पौराणिक कथा प्रसिद्ध है, कि एक बार राधा के पिता वृषभान भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन एक सरोवर के निकट से गुजर रहे थे, कि उन्हें एक बालिका कमल के फूल पर तैरती हुई मिली, जिसे उन्होनें पुत्री के रुप में अपना लिया. कहा जाता है,

कि राधा आयु में श्री कृष्ण से ग्यारह माह बडी थी. वे बचपन से ही भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त थी. श्री राधा का जन्म दिवस बरसाने के ब्रहोश्वरगिरी मंदिर में सैंकडों वर्षों से प्रत्येक वर्ष बडी धूमधाम से मनाया जाता है. इस स्थान पर भाद्रपद एकादशी से लेकर भाद्रपद की चतुर्दशी के मध्य की अवधि में एक आध्यात्मिक मेले का आयोजन किया जाता है.

राधा और कृष्ण से जुड़े अन्य स्थलों में भी समारोह व मेलों का आयोजन किया जाता है. बरसाने के अलावा श्री राधा अष्टमी वृन्दावन में भी धूमधाम से मनाई जाती है. यहां राधा रानी के जन्म की खुशी में नृत्य और संगीत का आयोजन किया जाता है. इस दिन यह शहर एक दुल्हन सा सुंदर प्रतीत होता है.

श्री राधा अष्टमी के दिन बरसाने का राधा मंदिर फूलों से सजाया जाता है. राधा जी को लड्डूओं का भोग लगाया जाता है. छप्पन भोग बनाकर राधा जी को नैवेद्ध अर्पित किया जाता है. भोग लगाने के बाद यह प्रसाद मोर को खिला दिया जाता है.

Leave a Comment